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Tuesday, December 15, 2009

मैं तार बजाया करती हूँ , सितार बजाया करती हूँ,

प्रतिपल हरदम, हरदम प्रतिपल,


मैं तार बजाया करती हूँ ,

सितार बजाया करती हूँ,

मधुर स्वरों के मोती चुन,

व सात स्वरों को अदल,बदल,

तानालापों से आभूषित,

ताल लय के धागों में,

रागमाला पिरोती हूँ ,

बिहाग, बिलावल, मालकोंश,

भूपाली, व बागेसरी, खमाज,

रागों की माला झंकृत कर,

झाला बजाया कर हूँ.

मैं तार बजाया करती हूँ ,

सितार बजाया करती हूँ,

स्वर लय की मैं साधिका,

प्रतिपल गुनगुनाती हूँ ,

संगीत की मैं प्रेमिका.

सुर सरिता में गोते खाते,

रसरंजित हो मधु मस्त हुई,

मैं काल बिताया करती हूँ.

व तार बजाया करती हूँ,

संगीत मय मेरा जीवन,

स्वप्नों में भी तो गाती हूँ.

प्रतिपल मधुर, हर क्षण मधुर,

मैं तार बजाया करती हूँ ,

हरदम प्रतिपल,प्रतिपल,हरदम ,

सितार बजाया करती हूँ,

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