प्रतिपल हरदम, हरदम प्रतिपल,
मैं तार बजाया करती हूँ ,
सितार बजाया करती हूँ,
मधुर स्वरों के मोती चुन,
व सात स्वरों को अदल,बदल,
तानालापों से आभूषित,
ताल लय के धागों में,
रागमाला पिरोती हूँ ,
बिहाग, बिलावल, मालकोंश,
भूपाली, व बागेसरी, खमाज,
रागों की माला झंकृत कर,
झाला बजाया कर हूँ.
मैं तार बजाया करती हूँ ,
सितार बजाया करती हूँ,
स्वर लय की मैं साधिका,
प्रतिपल गुनगुनाती हूँ ,
संगीत की मैं प्रेमिका.
सुर सरिता में गोते खाते,
रसरंजित हो मधु मस्त हुई,
मैं काल बिताया करती हूँ.
व तार बजाया करती हूँ,
संगीत मय मेरा जीवन,
स्वप्नों में भी तो गाती हूँ.
प्रतिपल मधुर, हर क्षण मधुर,
मैं तार बजाया करती हूँ ,
हरदम प्रतिपल,प्रतिपल,हरदम ,
सितार बजाया करती हूँ,
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