सुंदर मोर मुकुट सुशोभित,
पीताम्बर है सोहे,
गल बैजंती माला सोनी ,
राधा का मन मोहे,
गोपियन संग रास रचाए,
ऐसा है नन्द लाला,
मीरा के मन को भी मोहे,
मोहन मुरली वाला.
जमना तट पर बंशी बजावत ,
गइन का रखवाला,
अर्जुन को वह पाठ पढ़वात,
गीता का रचवाला.
No comments:
Post a Comment